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अंकारा/एथेंस: भारत ने तुर्की को बहुत बड़ा स्ट्रैटजिक झटका देते हुए उसके सबसे बड़े दुश्मन ग्रीस के साथ पूर्वी भूमध्यसागर में नौसैनिक अभ्यास किया है। शुक्रवार 22 अगस्त को क्रेते के उत्तरी समुद्री क्षेत्र में भारतीय नौसेना के एचएस रिट्सोस और आईएनएस तमाल के बीच एक पासिंग अभ्यास आयोजित किया गया था। इस दौरान भारतीय नौसेना ने कम्युनिकेशन और एडवांस युद्धाभ्यास किया है। इस ज्वाइंट नेवल एक्सरसाइज के दौरान ऑपरेशनल तत्परता बढ़ाने और युद्ध की क्षमता का स्तर बढ़ाने को लेकर युद्धाभ्यास किया गया।

हालांकि क्रेते के उत्तर में आयोजित इस पासिंग एक्सरसाइज को भले ही सिर्फ टेक्नोलॉजिकल कम्युनिकेशन और मैन्युवरिंग ड्रिल के रूप में दिखाया गया है, लेकिन इसके जरिए भारत ने तुर्की को बहुत बड़ा स्ट्रैटजिक संदेश दिया है। यह क्षेत्र पहले से ही तुर्की और ग्रीस के बीच समुद्री सीमाओं, गैस भंडारों और नौसैनिक प्रभुत्व को लेकर खींचतान का केन्द्र रहा है। ऐसे में भारतीय नौसेना का वहां पहुंचना और ग्रीस के साथ नौसैनिक उपस्थिति दर्ज कराना, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

नौसैनिक अभ्यास तुर्की को संदेश क्यों है?
तुर्की ब्लैक सी और भूमध्यसागर के बीच खुद को एक ब्रिज मानता है और वो लंबे समय से पूर्वी भूमध्यसागर पर खुद का दावा आक्रामकता के साथ ठोकता रहा है। इसके अलावा साइप्रस के समुद्री जलक्षेत्र और ग्रीक के द्वीपों को लेकर भी उसके अधिकार वाले दावे टकराव को बढ़ाते रहे हैं। यही वजह है कि जब भारत जैसी बड़ी नौसैनिक शक्ति, ग्रीस के साथ समुद्री सहयोग करती है, तो तुर्की का पारा हाई होना तय हो जाता है। तुर्की इसे सिर्फ एक आम समुद्री अभ्यास के तौर पर नहीं लेगा, बल्कि इसे वो रणनीतिक संकेत मानेगा। इसको लेकर तुर्की की आंतरिक राजनीति में भी बवाल शुरू हो सकता है।
इसके अलावा ये युद्धाभ्यास तुर्की की ‘ब्लू होमलैंड’ रणनीति को भी सीधी चुनौती देता है। ‘ब्लू होमलैंड’ रणनीति के जरिए तुर्की अपने नजदीकी समुद्री जलक्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाता है, जिसमें एजियन सागर और पूर्वी भूमध्यसागर का विशाल समुद्री क्षेत्र शामिल है। ऐसे में अगर भारतीय नौसेना का बेड़ा उस जलक्षेत्र में पहुंचता है और ग्रीस जैसे देशों के साथ युद्धाभ्यास करता है तो तुर्की इसे सीधी चुनौती के तौर पर देखेगा। भारत का उस जल क्षेत्र में पहुंचना तुर्की की रणनीति को कमजोर करता है। इसके अलावा ग्रीस ने भारतीय नौसेना के साथ युद्धाभ्यास करके यह संदेश भी दिया है कि वह अपने सुरक्षा और रक्षा सहयोग को सिर्फ यूरो-अटलांटिक ढांचे तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि अब वो ग्लोबल प्लेयर्स के साथ तुर्की की आक्रामकता को चुनौती देगा।
पाकिस्तान की मदद करने वाले पर पलटवार
तुर्की ने मई महीने में भारत के साथ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की मदद की थी। जिसके बाद से ही भारत ने तुर्की की घेराबंदी तेज कर दी है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एपी सिंह भी पिछले दिनों ग्रीस गये थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस की यात्रा की थी। इसे तुर्की के खिलाफ भारत की बड़ी स्ट्रैटजी मानी जा रही है और ये संकेत देता है कि अगर तुर्की पाकिस्तान की मदद करने की कोशिश करता है तो भारत उसके पड़ोसियों के साथ सैन्य संबंध बनाएगा। ग्रीस ने भारतीय मिसाइल खरीदने को लेकर भी दिलचस्पी दिखाई है। इससे पहले भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने सितंबर 2024 में ग्रीस की आधिकारिक यात्रा की थी। उनकी यात्रा के दौरान, ग्रीक और भारतीय नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने और विस्तारित करने पर सहमति बनी थी।