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मॉस्को: रूस की यात्रा पर पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को लेकर चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले चाल वर्षों में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही व्यापार असंतुलन भी बहुत बढ़ा है। जयशंकर ने यह बात बुधवार को मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता करते हुए कही। इस बैठक का उद्देश्य व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करना है।

इस दौरान जयशंकर ने कहा, जैसा कि आपने उल्लेख किया है कि पिछले चार वर्षों में वस्तुओं का हमारा द्विपक्षीय व्यापार पांच गुना से भी ज्यादा बढ़ा है। यह 2021 में 13 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 68 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है और यह लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा, हालांकि, इस बढ़ोतरी के साथ एक बड़ा व्यापार असंतुलन भी जुड़ा है। यह 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 58.9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है, जो लगभग 9 गुना है।

असंतुलन पर तत्काल ध्यान देने की कही बात

जयशंकर ने कहा कि इस व्यापार असंतुलन पर हमें तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। जयशंकर ने दोनों देशों के नेताओं की लगातार प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, हमारे नेता आपस में घनिष्ठ और नियमित रूप से जुड़े हुए हैं। वे हमारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के लिए हमें बुद्धिमत्तापूर्ण और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। पिछले साल उनकी दो व्यक्तिगत बैठकें हुई हैं और वे हमारी रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रतिबद्ध हैं

रूसी थिंक टैंक के प्रतिनिधियों से बातचीत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को रूस के प्रमुख विद्वानों और थिंक टैंक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इस दौरान भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों, बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य और भारत के दृष्टिकोण पर चर्चा हुई। जयशंकर इन दिनों रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा, ‘रूस के प्रमुख विद्वानों और थिंक टैंक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करके खुशी हुई। भारत-रूस संबंधों, समकालीन वैश्विक भू-राजनीति और भारत के दृष्टिकोण पर चर्चा की।’

रूस के न्योते पर पहुंचे हैं जयशंकर

मॉस्को के अलेक्जेंडर गार्डन में स्थित ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ पर भी जयशंकर ने पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्मारक द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए सोवियत सैनिकों की याद में बनाया गया है। यह दौरा रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मांटुरोव के आमंत्रण पर हो रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी” को और प्रगाढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। जयशंकर की यात्रा के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। दोनों नेताओं की मुलाकात इससे पहले 15 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान और हाल ही में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हुई थी।

इस साल की शुरुआत में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मॉस्को गए थे, जहां उन्होंने रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रे रुदेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श किए थे। इस राजनयिक सक्रियता के बीच, संभावना है कि इस वर्ष के अंत तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर भारत का दौरा कर सकते हैं।