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नई दिल्लीः बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने गुरुवार को निवेशकों की मृत्यु के बाद उनके शेयरों और निवेश को वारिसों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है। सेबी ने क्लेम की लिमिट बढ़ाने और 21 दिनों के भीतर निपटारा करने का नया प्लान तैयार किया है। इसका मकसद नॉमिनी और कानूनी वारिसों के लिए निवेश की गई रकम को क्लेम करना सरल बनाना है।

नियामक ने कहा कि मृत निवेशकों के परिवारों को उनकी संपत्ति वापस दिलाने में मदद करने के लिए नियमों को आसान बनाना जरूरी है। सेबी ने कहा, आसान कागजी कार्रवाई के लिए मौजूदा सीमाएं काफी समय पहले तय की गई थीं। शेयर बाजार में आई तेजी और निवेश की बढ़ती वैल्यू को देखते हुए इन सीमाओं को बदलने की सख्त जरूरत है। सेबी ने अपने एक कंसल्टेशन पेपर में सुझाव दिया है कि कम कागजी कार्रवाई के लिए पैसों की सीमा को बदला जाए। साथ ही, छोटे क्लेम के लिए ‘स्ट्रेट-थ्रू प्रोसेसिंग’ (STP) सिस्टम शुरू किया जाए ताकि कागजी झंझट कम हो और क्लेम का निपटारा जल्दी हो सके।

सेबी का प्रस्ताव

  • छोटे क्लेम के लिए स्ट्रेट-थू प्रोसेसिंग (STP) शुरू होगी, जिससे बिना भाग-दौड़ के काम होगा।
  • दस्तावेजों में ढील दी गई है। अब क्यूआर कोड वाले मृत्यु प्रमाण पत्र और तहसीलदार लेवल के सर्टिफिकेट भी मान्य होंगे।
  • आवेदन मिलने के बाद 21 दिनों के अंदर क्लेम प्रोसेस करना अनिवार्य होगा।

नए नियमों में क्या होगा?

प्रस्ताव के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र के तौर पर अब मूल सर्टिफिकेट, नॉमिनी द्वारा वेरिफाइड कॉपी, नोटरी या गजटेड ऑफिसर से अटेस्टेड कॉपी या क्यूआर कोड वाला सर्टिफिकेट मान्य होगा। कानूनी वारिस होने का प्रमाण पत्र तहसीलदार या उससे ऊंचे पद के अधिकारी की ओर जारी किया जाना चाहिए। सेबी ने छोटे दावों के लिए एक नया एसटीपी (STP) सिस्टम प्रस्तावित किया है। इसका मकसद ये है कि जहां कागजात बनवाने का खर्च निवेश की वैल्यू से ज्यादा हो, वहां राहत मिल सके।

नई तय सीमाएं क्या?

प्रस्ताव के मुताबिक फिजिकल शेयरों के लिए 10,000 रुपये और डीमैट शेयरों के लिए 30,000 रुपये तक के क्लेम STP के जरिए तुरंत निपटाए जाएंगे। वहीं आसान कागजी कार्रवाई की सीमा फिजिकल होल्डिंग के लिए बढ़ाकर 10 लाख रुपये और डीमैट होल्डिंग के लिए 30 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। कंपनियां चाहें तो फिजिकल शेयरों के लिए 10 लाख की इस सीमा को और भी बढ़ा सकती हैं।

नॉमिनी पहले से तय है तो?

अगर किसी निवेश में नॉमिनी पहले से तय है, तो प्रक्रिया और सरल होगी। नॉमिनी को बस एक फॉर्म, डीमैट अकाउंट की डिटेल (CML), मृत्यु प्रमाण पत्र और आईडी प्रूफ देना होगा। इससे क्लेम जल्दी निपट जाएंगे।

नॉमिनी या वसीयत नहीं है तो?

जिन मामलों में नॉमिनी या वसीयत (Will) नहीं है, वहां सेबी ने जोखिम के आधार पर अलग-अलग नियम बनाए हैं। छोटे दावों (STP के तहत) के लिए सिर्फ बेसिक फॉर्म और आईडी देनी होगी। उससे बड़े लेकिन तय सीमा के भीतर वाले दावों के लिए क्षतिपूर्ति बॉण्ड और अन्य वारिसों से एनओसी (NOC) की जरूरत होगी।

समय सीमा कितना?

सेबी ने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के 21 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा हो जाना चाहिए। अगर कोई देरी या रिजेक्शन होता है, तो उसकी वजह बतानी होगी।

विदेश में रहने पर?

विदेशों में रहने वाले निवेशकों की मृत्यु के मामले में वहां के बैंक अधिकारियों या भारतीय दूतावास से सत्यापित दस्तावेज भी स्वीकार किए जाएंगे। सेबी ने इन प्रस्तावों पर जनता से 2 अप्रैल तक राय मांगी है।