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गुवाहाटी : असम के चाय बागान श्रमिकों के लिए आज ऐतिहासिक दिन रहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में एक विशेष समारोह के दौरान चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे (लैंड पट्टा) वितरण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। चाय बगान के मजदूरों ने केंद्र सरकार के इस कदम को ऐतिहासिक बताया और इस फैसले की सराहना की। इस दौरान पीएम मोदी ने चाय के बागान और चाय श्रमिकों को अपने जीवन से कनेक्ट किया तो जमकर तालियां बजीं। पीएम मोदी ने कहा कि चाय बागान में काम करनेवाले श्रमिकों की चाय की पत्ती से बनी चाय बेच-बेचकर ही वह प्रधानमंत्री बने हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए टी बागान के श्रमिकों का सम्मान करना मतलब, मैं उनका कर्ज उतार रहा हूं। श्रमिक चाय बागान में काम करते थे। यह चाय की पत्ती दूर गांव में गुजरात तक पहुंचती थी।

‘श्रमिक भाइयों का कर्ज उतारने आया’

पीएम मोदी ने कहा कि उसी चाय की पत्ती से बनी चाय बेच-बेचकर वह प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच गए। अब आप बताइए कि अगर टी गार्डनवालों की चाय नहीं होती तो मैं यहां पहुंचता क्या? ये टी गार्डनवालों की टी मेरे यहां पहुंची और मैं आज यहां आप तक पहुंचा। मां कामाख्या की ऐसी कृपा है कि आज मुझे अपने टी गार्डन के श्रमिक भाइयों का कर्ज उतारने का मौका मां कामाख्या ने मुझे दिया है।

ब्रिटिश काल से लेबर लाइन में रह रहे थे श्रमिक

पीएम मोदी ने कहा कि राज्य भर के लगभग 3.5 लाख चाय बागान परिवारों को भूमि का लाभ मिलेगा। ये श्रमिक ब्रिटिश काल से ही ‘लेबर लाइन’ में रहते आए हैं लेकिन उनके पास कभी स्थायी भूमि अधिकार नहीं था। पीएम मोदी ने पहले पट्टा एक योग्य चाय बागान श्रमिक को सौंपा, जिसके बाद राज्यव्यापी वितरण शुरू हुआ।

हिमंत बिस्व सरमा का तारीफ

कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम चाय बागान समुदाय के प्रति ‘ऋण चुकाने’ जैसा है, जो 200 वर्षों से असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि यह पहल चाय बागान श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने, आवास सुरक्षा प्रदान करने और सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास है। पहले चरण में हजारों परिवारों को पट्टे दिए गए, और धीरे-धीरे सभी चाय बागानों में विस्तार होगा।

डिब्रूगढ़ के एक चाय मजदूर मोहन लाल ने खुशी जताते हुए कहा, "हमारा इतिहास बहुत पुराना है। ब्रिटिश काल से आज तक हम इस फैसले का इंतजार कर रहे थे। मोदी सरकार ने हमारी माटी का पट्टा देकर हमारा मान बढ़ाया है। अब हम अपना घर बना सकेंगे और भविष्य सुरक्षित होगा। मोदी सरकार और मुख्यमंत्री सरमा का बहुत-बहुत धन्यवाद। चाय बागान समुदाय, जो मुख्य रूप से आदिवासी और चाय जनजाति से हैं, ने इस पहल को ‘ऐतिहासिक’ बताया। कई श्रमिकों ने कहा कि पहले कांग्रेस सरकारों में ऐसा कभी नहीं हुआ, लेकिन मोदी सरकार ने वादे पूरे किए। पट्टे मिलने से वे घर बना सकेंगे, ऋण ले सकेंगे और सरकारी योजनाओं का बेहतर लाभ उठा सकेंगे।