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नई दिल्ली: गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट AI की रेस में आगे रहने के लिए भारी-भरकम फंड जुटा रही है। इसके लिए कंपनी ने 100 साल की अवधि वाला अनोखा बॉण्ड जारी करने का फैसला किया है। पिछले 30 साल में ऐसा किसी टेक कंपनी द्वारा नहीं किया गया है। इससे पहले साल 1996 में आईबीएम ने ऐसा किया था। फाइनैंशल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह 100 साल वाला बॉण्ड अल्फाबेट द्वारा पाउंड में कर्ज जुटाने की पहली कोशिश का हिस्सा है। इसके साथ ही, कंपनी अमेरिकी डॉलर बॉण्ड के जरिए भी 20 अरब डॉलर जुटा रही है।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, पहले कंपनी ने 15 अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई थी। जब निवेशकों की तरफ से 100 अरब डॉलर से ज्यादा की डिमांड (ऑर्डर) आई, तो कंपनी ने कर्ज की रकम बढ़ा दी। इसके अलावा स्विस फ्रैंक में भी बॉण्ड लाने की तैयारी है। डॉलर वाले बॉण्ड को सात हिस्सों में बांटा गया है। इसमें सबसे लंबी अवधि का बॉण्ड 40 साल का है, जो 2066 में मैच्योर होगा। बाजार में इस कर्ज की बहुत ज्यादा मांग है, खासकर छोटे समय (3 साल) वाले बॉण्ड के लिए निवेशकों में काफी उत्साह देखा गया।

कंपनी क्यों ला रही ऐसा बॉण्ड?

इस सौदे से जुड़े एक बैंकर ने बताया कि अलग-अलग करंसी (जैसे पाउंड, डॉलर, स्विस फ्रैंक) में बॉण्ड जारी करने से अल्फाबेट को दुनिया भर के नए निवेशकों से जुड़ने में मदद मिलती है। आजकल बड़ी टेक कंपनियों की पैसों की जरूरतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। अगर वे सिर्फ डॉलर बाजार पर निर्भर रहेंगी, तो मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ सकता है। साथ ही, पाउंड मार्केट में ब्याज दरें डॉलर के मुकाबले कम हैं, जिससे 100 साल वाला यह बॉण्ड कंपनी के लिए सस्ता और फायदेमंद साबित होगा।कुछ दिन पहले ही अल्फाबेट ने कहा था कि वह इस साल अपने कामकाज और विस्तार पर 185 अरब डॉलर तक खर्च कर सकती है। अल्फाबेट मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की तीसरी बड़ी कंपनी है। मंगलवार के बंद भाव पर उसका मार्केट कैप 3.854 ट्रिलियन डॉलर है। उससे पहले केवल दो कंपनियां एनवीडिया (4.590 ट्रिलियन डॉलर) और ऐपल (4.022 ट्रिलियन डॉलर) है। दुनिया का टॉप 5 कंपनियों में सभी अमेरिका की हैं। इनमें एनवीडिया, ऐपल और अल्फाबेट के बाद माइक्रोसॉफ्ट (3.071 ट्रिलियन डॉलर) और ऐमजॉन (2.221 ट्रिलियन डॉलर) का नंबर है।