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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड ऑर्डर के बिखरने का खतरा मंडरा रहा है। वेनेजुएला पर हमले और ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक बयानबाजी ने अमेरिका के विरोधियों ही नहीं, सहयोगियों तक को डरा दिया है। कभी जिस सैन्य संगठन नाटो की धमक गूंजती थी, आज उसके अस्तित्व पर संकट आ गया है। इस बीच कनाडा से एक हैरान करने वाली खबर आई है कि देश की सेना ने अमेरिका के संभावित सैन्य हमले का जवाब देने के लिए एक मॉडल तैयार किया है। एक सदी में यह पहली बार है जब कनाडा के सशस्त्र बलों ने देश पर अमेरिकी हमले से निटपने का मॉडल बनाया है।

नाटो देशों को सता रहा डर

कनाडा को अमेरिकी हमले का डर सता रहा है जबकि वह उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) का संस्थापक सदस्य है और कॉन्टिनेंटल एयर डिफेंस में अमेरिका का साझेदार है। कनाडा के प्रमुख मीडिया आउटलेट द ग्लोब एंड मेल ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। रिपोर्ट में इस मुद्दे पर बात करने वाले कनाडाई सैन्य बलों के अधिकारियों की पहचान नहीं बताई गई है।

कनाडा की सैन्य तैयारी की योजना ऐसे में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप NATO सहयोगियों को लगातार चुनौती दे रहे हैं। ट्रंप ने बार-बार ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की बात कही है। साथ ही उन यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है जो इस अधिग्रहण का विरोध करते हैं। इसी साल की शुरुआत में वेनेजुएला पर आक्रामक हमलों के बाद ये धमकियां तेज हो गई हैं।

कनाडा कितने दिन तक टिक सकेगा?

दो सीनियर अधिकारियों ने ग्लोब एंड मेल से कहा कि सैन्य योजनाकार कनाडा पर दक्षिण से अमेरिकी हमले का मॉडल बना रहे हैं। इसमें अनुमान लगाया गया है कि अमेरिकी सेनाए एक सप्ताह के अंदर और शायद दो दिनों में ही जमीन और समुद्र में कनाडा की रणनीतिक स्थितियों पर कब्जा कर लेंगी।अधिकारियों का कहना है कि कनाडा के पास जरूरी जवान या आधुनिक सैन्य उपकरण नहीं हैं, जिससे वह पारंपरिक हमले की स्थिति में अमेरिका का सामना कर सके। ऐसे में कनाडाई सेना अपरंपरागत युद्ध की कल्पना कर रही है। इसमें अनियमित सेना या हथियारबंद नागरिकों को छोटे-छोटे समूह घात लगातार हमला करने, तोड़फोड़, ड्रोन युद्ध या हिट-एंड-रन रणनीति का इस्तेमाल करेंगे।

तालिबानी मॉडल से मुकाबले की तैयारी

एक अधिकारी ने बताया कि इस मॉडल में अफगान मुजाहिदीनों की रणनीतियां शामिल हैं, जिसे 1979-89 के सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया था। ये वही रणनीतियां हैं जिनका इस्तेमाल तालिबान ने अमेरिका और कनाडा समेत सहयोगी सेनाओं के खिलाफ 20 साल के युद्ध में किया था। अधिकारी ने बताया कि इसका मकसद कब्जा करने की स्थिति में अमेरिकी सेनाओं को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना होगा।

कनाडा का मिलिट्री मॉडल का साफ सबूत है कि वॉशिंगटन और ओटावा के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे हैं। कनाडा अब ट्रंप प्रशासन पर भरोसा नहीं कर रहा है। इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि अमेरिका के दबदबे वाली पुरानी वैश्वक व्यवस्था अब वापस नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि पुरानी वैश्विक व्यवस्था खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि पुराना वर्ल्ड ऑर्डर एक झूठ था जिसमें पीड़ित के लिए अलग कानून थे और शोषक के लिए अलग कानून थे। कार्नी के बयान को अमेरिका के खिलाफ सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।