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वॉशिंगटन/नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। लेकिन शुरुआत में पश्चिमी देशों के अखबार ऐसा लग रहा था कि वो पाकिस्तान के मुख पत्र बने हुए हैं। भारत के बारे में अनाप शनाप दावे कर रहे थे। लेकिन अब जबकि धीरे धीरे झूठ के बादल छंटने लगे हैं तो अमेरिकी अखबारों ने सच कबूलना शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के बाद अब वॉशिंगटन पोस्ट ने भी कबूल किया है कि भारतीय एयरस्ट्राइक्स में पाकिस्तान को तगड़ा नुकसान हुआ है। पाकिस्तान लगातार झूठी दावे कर रहा था कि उसने भारत पर घातक हमले किए हैं और भारत को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन पश्चिमी देशों की मीडिया ने अब मजबूरी में ही सही, लेकिन सच लिखना शुरू कर दिया है।

पाकिस्तान पहले दावे कर रहा था कि उसने भारत के कई एयरबेस पर हमले किए हैं। भारतीय डिफेंस सिस्टम एस-400 को उड़ा दिया है, कई फाइटर जेट्स गिरा दिए हैं, दिल्ली पर हमले कर दिए हैं और ये दावे पाकिस्तान की मीडिया के नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के थे। लेकिन अब वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के हमले में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है और पाकिस्तानी एयर डिफेंस भारत के हमलों को रोकने में पूरी तरह से नाकाम रही हैं।

पश्चिम ने माना कितना घातक था भारत का हमला
वाशिंगटन पोस्ट ने सैटेलाइट तस्वीरों और कई और दूसरे साक्ष्यों के हवाले से एक्सपर्ट्स के जरिए विश्लेषण किया है। इसमें कहा गया है कि "शनिवार को पाकिस्तान पर भारतीय हमलों में कम से कम छह हवाई अड्डों पर रनवे और संरचनाओं को नुकसान पहुंचा, जिसके बारे में विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच दशकों से चल रहे संघर्ष में यह अपनी तरह का सबसे बड़ा हमला था।" वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि "दो दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और उसके बाद के वीडियो की समीक्षा में पाया गया कि हमलों में वायु सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तीन हैंगर, दो रनवे और दो मोबाइल इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। भारत द्वारा निशाना बनाए गए कुछ स्थल पाकिस्तान के 100 मील अंदर तक थे।"

वॉशिंगटन पोस्ट ने किंग्स कॉलेज लंदन के इंटरनेशनल रिलेशन के सीनियर प्रोफेसर और दक्षिण एशियाई सुरक्षा मुद्दो के विशेषज्ञ वाल्टर लैडविग के हवाले से लिखा है कि ‘साल 1971 के बाद भारत ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर सबसे खतरनाक हवाई हमले किए थे।’ वहीं, विलियम गुडहिंड कॉन्टेस्टेड ग्राउंड के एक भू-स्थानिक विश्लेषक हैं और जो सैटेलाइट तस्वीरों की एनालिसिस करने के एक्सपर्ट हैं, उन्होंने कहा कि ‘भारत ने पाकिस्तान के हाई वैल्यू टारगेट पर पिन प्वाइंट हमले किए, जिसका मकसद पाकिस्तान की आक्रामक और डिफेंसिव एयर फोर्स क्षमता को गंभीर रूप से कम करना था।’ वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि ‘भारत ने पाकिस्तान में 11 ठिकानों पर सटीक हमला करने के दावे किए हैं और इनमें वो स्थान शामिल हैं, जहां वॉशिंगटन पोस्ट ने नुकसान की पुष्टि की है, जिसमें भारत ने दावा किया है कि उसका हमला ‘मापा हुआ’ और ‘कैलिब्रेटेड’ था।

इसके अलावा वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी एट अल्बानी में एसोसिएट प्रोफेसर और भारत-पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता पर किताब लिख चुके क्रिस्टोफर क्लेरी ने कहा कि "सैटेलाइट तस्वीरें भारत के इस दावे के मुताबिक ही हैं कि भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में कई ठिकानों पर पाकिस्तानी वायु सेना को महत्वपूर्ण नुकसान पहुंचाया, लेकिन मेरे ख्याल से वो विनाशकारी नहीं था और भारत ने भी कहा है कि उसका मकसद सिर्फ पिन प्वांइट हमले करना था और तबाही मचाना नहीं था।’ वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि ‘इस्लामाबाद के ठीक बाहर रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर पाकिस्तान के दो मोबाइल नियंत्रण केंद्र नष्ट हो गए।"
‘भारत के हमले का मकसद संदेश देना था’
वॉशिंगटन पोस्ट ने एक सैन्य विश्लेषक का नाम लिए बना बताया कि ‘नूर खान एयर बेस पाकिस्तान में सबसे महत्वपूर्ण है और इस तरह के हमले को देश के न्यूक्लियर कमांड सेंटर को नष्ट करने के प्रयास के रूप में समझा जा सकता है।" वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि "इसके अलावा पाकिस्तान एयरफोर्स के भोलारी और शाहबाज एयरबेस को गंभीर नुकसान पहुंचा है। भोलारी में एक हैंगर की छत में लगभग 60 फीट चौड़ा एक बड़ा छेद दिखाई दे रहा है, जिसके बारे में विशेषज्ञों ने कहा कि यह मिसाइल की क्षमता के मुताबिक है। वहीं बाहर मलबा बिखरा हुआ था और एक दीवार बगल की इमारत पर गिर गई थी। सैन्य शोधकर्ता के मुताबिक भोलारी हैंगर में आमतौर पर साब 2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान होता है, जिसकी कीमत करोड़ों डॉलर है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के समय विमान हैंगर में था या नहीं।"