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पटना: बिहार में राजनीति कब किस करवट बैठ जाए, कोई ठीक नहीं है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे ही लक्षण दिखने लगे हैं। बिहार में इतना तय हो गया है कि 20 साल बाद नीतीश युग समाप्त होने वाला है। बिहार के सीएम की कुर्सी पर कोई और बैठेगा और वो बीजेपी से हो सकता है। लेकिन क्या नीतीश कुमार जैसे हार्ड बारगेनर के सामने बीजेपी के लिए ये आसान टास्क है? इसका सीधा जवाब है नहीं। इसीलिए बिहार में अब एक नई चर्चा चल रही है।

बिहार में कार्यकारी सीएम बनाया जा सकता है

बिहार के सियासी गलियारों में ये चर्चा बहुत तेजी से फैली है कि बिहार को अर्से बाद एक कार्यकारी मुख्यमंत्री मिल सकता है। इस चर्चा ने तब जोर पकड़ा जब रविवार को सीएम नीतीश के आवास पर एक बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में जदयू के तमाम बड़े नेता मौजूद थे। इसके बाद से ही कयासों का बाजार गर्म हो गया। पटना से दिल्ली तक इस बैठक की चर्चा सियासी गलियारे में होती रही। लेकिन इसी के बीच इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि बिहार में एक कार्यकारी सीएम बनाया जा सकता है।

क्या कहते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट

पटना के मशहूर पॉलिटिकल एक्सपर्ट और शिक्षाविद् डॉक्टर संजय कुमार के मुताबिक ‘बिहार में ऐसा पहले भी हो चुका है। जब तक नई सरकार का गठन नहीं होता है सीएम नीतीश कुमार को भी राज्यपाल कार्यकारी सीएम बने रहने को कह सकते हैं। संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि बीजेपी का कोई पूर्णिकालिक सीएम न होकर कार्यकारी सीएम होगा। जिससे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर असर न पड़े।’

कार्यकारी सीएम की चर्चा की वजह नंबर 1

इस चर्चा के पीछे 3 वजहें बताई जा रही हैं। इसमें सबसे बड़ी वजह या यूं कहें कि रणनीति का हवाला दिया जा रहा है। चर्चा है कि बिहार में नीतीश कुमार सीएम का पद छोड़ देंगे। उन्हें राज्यसभा भी जाना है। हमारे एक सूत्र ने बताया कि ऐसे में नीतीश कुमार तीन महीने के लिए बतौर राज्यसभा सदस्य दिल्ली रहेंगे, लेकिन वो नए मुख्यमंत्री के काम पर नजर रखेंगे। कार्यकारी सीएम के कामकाज को नीतीश 3 महीने तक देखेंगे, अगर नए कार्यकारी सीएम का काम नीतीश की नीतियों के मुताबिक रहा तो नीतीश उन्हें आगे के लिए हरी झंडी दे देंगे।

कार्यकारी सीएम की चर्चा की वजह नंबर 2

इस चर्चा के पीछे एक रणनीति या वजह ये मानी जा रही है कि ऐसे में निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। कार्यकारी सीएम और पिता नीतीश दोनों की छत्रछाया में निशांत कुमार की सत्ता वाली ट्रेनिंग होगी। इस तरह से निशांत को दो अलग-अलग जगहों से गाइडेंस मिलेगी। पहली दिल्ली से पिता नीतीश कुमार के जरिए, जो कि लॉजिक यानी थ्योरी वाली होगी। वहीं दूसरी ट्रेनिंग प्रैक्टिकल होगी, यानी सत्ता और मशीनरी को करीब से समझना। इसके बाद निशांत कुमार को भी सीएम के चेहरे के लिए भविष्य में आगे करने में जदयू को आसानी होगी।

कार्यकारी सीएम की चर्चा की वजह नंबर 3

अब अगर तीसरी वजह की बात करें तो वो असम और पश्चिम बंगाल समेत देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। चर्चा है कि बीजेपी इसी वजह से बिहार में अभी बड़ा रिस्क लेने के मूड में नहीं है। ऐसे में नीतीश कुमार सीधे सीएम की कुर्सी छोड़ कर दिल्ली जाएंगे तो इससे विरोधी इन चुनावों में बीजेपी पर गठबंधन धर्म को लेकर कई तोहमतें लगा सकते हैं। ऐसे में नीतीश के बदले एक कार्यकारी सीएम देकर बीजेपी एक तीर से कई निशाने साध सकती है। चुनावों में भी उसके पास ऐसे आरोपों पर जवाब देने के लिए ‘एक अस्त्र’ मिल जाएगा।