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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा के बाद आज कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट आई है। इससे होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद बंधी है। दुनिया का 20 फीसदी तेल इसी इलाके से गुजरता है। लेकिन ईरान युद्ध के कारण वहां से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई थी। इसके कारण कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था जो यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर था।

लेकिन पश्चिम एशिया में सीजफायर की घोषणा से कच्चे तेल में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड में 15 फीसदी और डब्ल्यूटीआई क्रूड में 23 फीसदी तक गिरावट आई। भारतीय समय के अनुसार 7.15 बजे ब्रेंट क्रूड 13.22 फीसदी यानी 14.45 डॉलर की गिरावट के साथ 94.82 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। इसी तरह अमेरिकन बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई भी 14.02 फीसदी यानी 15.83 डॉलर की गिरावट के साथ 97.12 डॉलर पर था। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह लगातार 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ था।

तेल भी ऐतिहासिक तेजी

ईरान तथा अमेरिका/इजरायल के बीच युद्ध के कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमत में 50 फीसदी से अधिक तेजी आई थी जो इतिहास में एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। होर्मुज स्ट्रेट से खाड़ी के कई देश अपना तेल निर्यात करते हैं। लेकिन इसके बंद होने से दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई टाइट हो गई थी। इसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा था। पाकिस्तान समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमत में भारी तेजी आई थी।

तेल का खेल

  • पश्चिम एशिया में सीजफायर से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट
  • ब्रेंट क्रूड 15 फीसदी और डब्ल्यूटीआई क्रूड 23 फीसदी गिरा
  • दुनिया का 20 फीसदी तेल होर्मुज की खाड़ी से गुजरता है
  • ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी

भारत पर असर

कच्चे तेल की कीमत कम होने से भारत को भी काफी फायदा होगा। इससे रुपये पर भी दबाव कम होगा और डॉलर के मुकाबले वह मजबूत होगा। भारत अपना 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ईरान युद्ध के कारण भारत में खासकर एलपीजी की काफी किल्लत हो गई थी। होर्मुज स्ट्रेट से तेल कारोबार सामान्य होने से भारत खाड़ी देशों से तेल और गैस का आयात कर सकेगा।