भोपाल। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संदेश के साथ आने वाले होली पर्व के लिए प्रदेश में स्वच्छ और स्वस्थ होली अभियान चलाया जाएगा। जनसहयोग एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से यह प्रयास किया जाएगा कि होलिका दहन में लकड़ी की जगह उपला या गोकाष्ठ का उपयोग हो।
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पर्यावरण संरक्षण और पानी बचाने के लिए प्राकृतिक व हर्बल रंगों से होली खेलने तथा पशु-पक्षियों पर रंग न डालने के संकल्प के साथ हुड़दंग से दूर रहकर भाईचारे के साथ होली का उत्सव मनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि गोकाष्ठ का उपयोग करने वाली पंजीकृत संस्थाओं के पदाधिकारियों को जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से इन्हें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान देने के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।
अभ्युदय मध्य प्रदेश अंतर्गत चलाए जाने वाले इस अभियान के क्रियान्वयन का जिम्मा कलेक्टर का होगा और संभागायुक्त पर्यवेक्षण करेंगे।
अभियान के तहत यह होगा
विभिन्न स्तरों पर आयोजित किए जाने वाले सार्वजनिक होलिका दहन कार्यक्रम का जिले में पंचायत तथा अन्य स्थानों पर तहसील तथा नगरीय निकायों के माध्यम से निःशुल्क पंजीयन किया जाएगा।
नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं को इसमें सम्मिलित किया जाएगा।
पंजीयन में आयोजक संस्था के पदाधिकारी, संपर्क नंबर इत्यादि जानकारी ली जाएगी।
होलिका दहन के दिन मैदानी अमले के साथ इन संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक होलिका दहन आयोजनों का भ्रमण कर, जलाऊ एवं इमारती वनों की लकड़ी के स्थान पर गोकाष्ठ आधारित होलिका दहन को प्रोत्साहित किया जाए।
होलिका दहन का आयोजन पूरी तरह गोकाष्ठ आधारित होने के दो-तीन दिन में संबंधित नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के संबंधित अधिकारी-कर्मचारी प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजेंगे।
कलेक्टर जिले में गोकाष्ठ आधारित होलिका दहन आयोजन की सूची तैयार करेंगे।
शासन द्वारा ऐसी संस्थाओं को भविष्य में अन्य किसी प्रकार से प्रोत्साहन या सहयोग दिया जाना हो तो प्राथमिकता दी जाएगी।



