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नई दिल्ली: छोटी कारें बनाने वाली कंपनियों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। अगर ईंधन की बचत और प्रदूषण कम करने से जुड़ा CAFE-3 का नया ड्राफ्ट लागू होता है, तो छोटी कारों को बनाना और बेचना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अलग-अलग मंत्रालय नियमों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पिछले दो सालों में CAFE-3 का यह तीसरा ड्राफ्ट है।

जानकारों का कहना है कि अगर कार कंपनियां नए नियमों की वजह से छोटी कारें बनाने में कम दिलचस्पी लेंगी, तो इससे उन लोगों को झटका लगेगा जो टू-व्हीलर से कार पर शिफ्ट होना चाहते हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि CAFE-3 लागू होने के बाद नई कारों की लागत करीब 10% तक बढ़ सकती है। कंपनियों को नए नियमों पर खरा उतरने के लिए या तो गाड़ियों में ईंधन बचाने वाली महंगी तकनीक लगानी होगी या फिर भारी जुर्माना भरना होगा।

पीएमओ को भेजी गईं सिफारिशें

प्रस्तावित दिशानिर्देशों के अनुसार, EVs या रेंज-एक्सटेंडर हाइब्रिड EVs बेचने वालों को तीन ‘सुपर क्रेडिट’ मिलेंगे, जबकि पेट्रोल-डीजल (ICE) गाड़ियां बेचने वालों को एक पॉइंट मिलेगा। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि BEE ने अपनी सिफारिशों में इस बात को बरकरार रखा है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजा गया है।