कनाडा की सीक्रेट एजेंसी (CSIS) ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में भारत पर कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाया। CSIS की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत "ट्रांस नेशनल दमन" (सीमा पार दमन) में मेन रोल निभाता है।
रिपोर्ट में चीन को कनाडा के लिए सबसे बड़ा सीक्रेट खतरा बताया गया। इसके अलावा रूस, ईरान और पाकिस्तान का भी नाम लिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय अधिकारी और कनाडा में मौजूद उनके प्रॉक्सी एजेंट्स ने कनाडाई नेताओं को प्रभावित करने की कोशिशें की है। इन भारतीय अधिकारियों ने कनाडा की नीतियों को भारत के हितों के मुताबिक मोड़ने की कोशिश की, खासकर खालिस्तान के मामले में।
रिपोर्ट में यह भी कहा है कि खालिस्तानी उग्रवादी भारत में हिंसा के लिए कनाडा का इस्तेमाल कर रहे हैं। CSIS ने कहा कुछ लोग कनाडा का इस्तेमाल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, धन जुटाने और प्लानिंग करने के लिए कर रहे हैं।
2024 में कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन इनकी एक्टिविटी कनाडा और उसके हितों के लिए खतरा बनी हुई हैं। खालिस्तानी उग्रवाद की वजह से भारत का कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप बढ़ रहा है।
कनाडाई रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथ को बताया जड़
कनाडा यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने G7 समिट में आपसी संबंधों को पटरी पर लाने की बात कही थी। हालांकि, रिपोर्ट में पहली बार साफ तौर पर यह स्वीकार किया गया है कि कनाडा की धरती का इस्तेमाल कुछ खालिस्तानी चरमपंथी भारत में हिंसा फैलाने, धन जुटाने और योजनाएं बनाने के लिए कर रहे हैं।
G7 समिट में मोदी बोले- भारत-कनाडा के संबंध महत्वपूर्ण
कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कननास्किस में 3 दिन चले G7 समिट में PM मोदी ने हिस्सा लिया। कनाडा के PM मार्क कार्नी ने मोदी का वेलकम किया। इसके बाद दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हुई।
मीटिंग के बाद मोदी ने कहा- भारत और कनाडा के संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं। मैं भारत को जी-7 में आमंत्रित करने के लिए आपका (कनाडाई PM) बहुत आभारी हूं। मैं भाग्यशाली भी हूं कि मुझे 2015 के बाद एक बार फिर कनाडा आने और कनाडा के लोगों से जुड़ने का अवसर मिला है।
इसी के साथ भारत और कनाडा के बीच हाई कमिश्नर को फिर से बहाल करने पर सहमति बन गई है। दरअसल आतंकी निज्जर हत्याकांड के बाद पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों ने 6-6 डिप्लोमैट्स को देश से निकाल दिया था।



