ब्रासीलिया/वॉशिंगटन: ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने अमेरिका पर सरकार की तख्तापलट की कोशिश करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। ब्राजील के राष्ट्रपति ने ये आरोप उस वक्त लगाया है जब अमेरिका के साथ उनके रिश्ते काफी खराब हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ने उनकी सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए तख्तापलट की साजिश रची थी। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील से होने वाले आयात पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक टकराव और भी गहरा गया है। ट्रंप और लूला के संबंध शुरू से ही खराब रहे हैं, क्योंकि ट्रंप ने हमेशा से ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो का समर्थन किया है। जैर बोल्सोनारो भी कट्टर ट्रंप समर्थक रहे हैं, लेकिन उनपर ब्राजील में चुनाव में धांधली करने और चुनाव हारने के बाद देश की संसद पर कब्जा करने की कोशिश के आरोप लगे थे, जैसा खुद ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद किया था।
लूला ने कहा कि अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो को समर्थन देकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश की, जो अब न्यायिक जांच के घेरे में हैं। आपको बता दें कि बोल्सोनारो पर आरोप है कि उन्होंने 2022 के चुनाव में हारने के बाद सत्ता नहीं छोड़ने की योजना बनाई थी। जांच में खुलासा हुआ है कि बोल्सोनारो और उनके सहयोगियों ने ब्राजील की सेना से संपर्क कर तख्तापलट की योजना बनाई थी, जिससे राष्ट्रपति लूला को पद ग्रहण करने से रोका जा सके। जांच में एक मसौदा डिक्री भी मिला है, जिसमें चुनाव परिणाम रद्द करने और नए चुनाव कराने की बात कही गई थी। अब बोल्सोनारो के खिलाफ ब्राजील में मुकदमा चल रहा है।
पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर लगातार सवाल उठाए थे और कहा था कि चुनाव में धांधली हुई है। यह रणनीति डोनाल्ड ट्रंप की 2020 में राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद की रणनीति से मिलती-जुलती मानी जाती है, जिसमें ट्रंप ने झूठे दावों से अपने समर्थकों को भड़काने की कोशिश की थी और बाद में उनके समर्थकों ने देश की संसद कैपिटल हिल पर हमला कर दिया था, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, राष्ट्रपति लूला ने डॉलर का बहिष्कार करने की भी अपील की है। राष्ट्रपति लूला ने ग्लोबल फाइनेंसिंस सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया अमेरिकी डॉलर की निर्भरता से बाहर निकले। उन्होंने कहा, "हम एक ऐसी दुनिया में नहीं रह सकते जहां एक ही देश की मुद्रा पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करे।"



