राजधानी के हथाईखेड़ा डैम में दुर्गा उत्सव के दौरान विसर्जित की गई प्रतिमाओं के साथ भी कालाबाजारी की जा रही है। प्रतिमाओं के स्ट्रक्चर को दोबारा बेचा जा रहा है। इस बिक्री का एक स्टिंग वीडियो सामने आया है। यह स्टिंग जय मां भवानी संगठन ने किया है। इसमें साफ दिख रहा है कि बिचौलिये खुलेआम प्रतिमाओं के ढांचे(स्ट्रक्चर) के रेट और सौदेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
दैनिक भास्कर के पास स्टिंग के सारे सबूत मौजूद हैं। संगठन का कहना है कि ये स्ट्रक्चर तालाब से निकालकर मूर्तिकारों को फिर से बेचे जा रहे हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से अनुचित है, बल्कि आस्था के साथ खिलवाड़ और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण भी है। बता दें कि हथाई खेड़ा डेम वही जगह है जहां हाल ही में मछली परिवार यहां चालीस साल से फर्जी समिति बनाकर मछली पालन का काम करता था।
आस्था से खिलवाड़, हादसे का भी खतरा जय मां भवानी संगठन के अध्यक्ष भानू हिंदू ने बताया हमें सूचना मिली थी कि हथाईखेड़ा डैम में कुछ बिचौलिए विसर्जित प्रतिमाओं के ढांचे निकालकर बेच रहे हैं। यह दोहरा अपराध है एक, हिंदू समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ और दूसरा, सुरक्षा के लिहाज से खतरा। ये स्ट्रक्चर कई दिन पानी में रहने से कमजोर हो चुके होते हैं, जिन्हें दोबारा मिट्टी लगाकर बनाना हादसे को न्योता देने जैसा है।
उन्होंने कहा कि स्टिंग में साफ दिख रहा है कि एक बिचौलिया 10 फीट की प्रतिमा का ढांचा 1000 रुपए में बेचने की बात कर रहा है। यह पूरा काम खुलेआम हो रहा है और इसमें नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। भानू हिंदू ने बताया कि वे इस मामले में भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग करेंगे।
जय मां भवानी संगठन द्वारा साझा किए गए दो वीडियो (प्रत्येक करीब एक मिनट लंबे) में प्रतिमाओं की बिक्री की पूरी बातचीत रिकॉर्ड है। एक वीडियो में व्यक्ति कहता सुना जा सकता है “10 फीट की दे रहा हूं 1000-500 में… 100 प्रतिंमाएं आज रात जाने वाली हैं।”दूसरे वीडियो में प्रतिमाओं के साइज और डिलीवरी टाइम की चर्चा हो रही है। इसमें यह भी संकेत मिलता है कि प्रतिमाएं रात में ट्रक में लोड कर बाहर भेजी जा रही हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग जय मां भवानी संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि हथाईखेड़ा डैम में प्रतिमाओं की इस अवैध बिक्री की सघन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि अगर यह कार्य वैध रूप से किया जा रहा है तो उससे होने वाली आमदनी नगर निगम के खाते में जानी चाहिए न कि बिचौलियों की जेब में।
10 फीट का ढांचा 1000 में
स्टिंग में सामने आए सौदे के मुताबिक 10 फीट ऊंची प्रतिमा का ढांचा 1000 रुपए में और इससे बड़ी मूर्ति का स्ट्रक्चर 1500 रुपए तक में बेचा जा रहा है। जबकि नई प्रतिमा का ढांचा तैयार करने के लिए बांस, लकड़ी, घास और मिट्टी लाकर बनवाया जाए तो 8 से 11 हजार रुपए तक का खर्च आता है। यानि विसर्जित प्रतिमाओं के इन कमजोर ढांचों को फिर से बेचकर हजारों रुपए की बचत की जा रही है।



