पटनाः इंदौर की तरहबिहार में भी जहरीला पानी का कहर कम नहीं। इस पानी को पीने से विकलांग तो हो ही रहे हैं ,कई लोगों की तो मृत्यु भी हो गई है। जी, हां यह कहानी है बिहार के मुंगेर जिला स्थित दूधपनिया गांव की। यहां फ्लोराइड युक्त पानी पीने से अपंग हो रहे हैं और गत एक साल में 6 लोगों की तो मौत हो गई है। स्थित इतनी खराब है कि राज्य सरकार ने हर घर नल जल योजना तक को रोक दी है।
किस मुसीबत से गुजर रहे हैं दूध पनिया गांव के निवासी
मुंगेर के हवेली खड़गपुर अनुमंडल स्थित दूधपनिया गांव में फ्लोराइड युक्त पानी के कहर से जूझ रहा है। विवशता यह है कि विकलांगता बढ़ने के बावजूद ये लोग जहरीला पानी पीने को विवश हैं। यहां तक कि नए चापाकल में भी फ्लोराइड की मात्रा इतनी अधिक है कि गत एक वर्ष में छह लोगों की मौत हो गई है। शायद ही ऐसा कोई घर भाषा होगा जिसके घर में विकलांगता का कहर न वर्षा हो।
यह कहर कई वर्षों से
दूधपनिया गांव बीते कई वर्षों से दूषित और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर है। इस बात की पुष्टि हर घर में विकलांग बच्चे को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। आज की स्थिति यह है कि करीब 50 घरों के इस गांव में एक से अधिक लोग फ्लोराइड से जुड़ी बीमारियों का शिकार हैं। इस बीमारी में सबसे पहले प्रभावित पैर होता है। पहले मांसपेशियों प्रभावित होती हैं, फिर हड्डियों के तेज दर्द होता है। फिर चलना फिरना सब दूभर हो जाता है। हड्डियां गल कर एकदम से कमजोर हो जाती है। और धीरे-धीरे आदमी मौत की गिरफ्त में आ जाता है। बीते एक साल में जिन छह लोगों की मौत हुई, उनमें फूलमानी देवी, रमेश मुर्मू, मालती देवी, सलमा देवी, रंगलाल मरांडी और झुमरी देवी की मौत हो गई है।
सरकार तो सक्रिय हुई
मीडिया में फ्लोराइड के कहर की बात आई तो सरकार सचेत हुई। सरकार ने फ्लोराइड युक्त पानी न पी सके इसके लिए कुछ काम तो हुए। जिला प्रशासन ने नया चापाकल काफी गहरी बोरिंग के बाद लगाया। लेकिन पानी में फ्लोराइड की मात्रा अभी भी अधिक थी। नतीजतन उस चापाकल को भी बंद कर दिया। हालांकि तत्काल नल-जल योजना की टंकी को दुरुस्त कर उसमें फिल्टर लगाया गया है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि इस पानी को गर्म करके ही पीने में इस्तेमाल करें। पर इतना काफी नहीं हैं। बगैर ट्रीटमेंट प्लांट के यहां कुछ ठीक होने वाला नहीं है। स्थानीय मीडिया की माने तटी बहुत जल्द गांव को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाएगा।



