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ओटावा: कनाडा की फेडरल कोर्ट ने भारतीय नागरिक कंवलजीत कौर की शरण की अपील खारिज कर दी है। कंवलजीत कौर ने कोर्ट में अपनी अर्जी में कहा कि खालिस्तान आंदोलन की समर्थक और सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़ाव के कारण भारत लौटने पर उनका उत्पीड़न होगा। ऐसे में उनको कनाडा में ही रहने की इजाजत दी जाए। SFJ बैन संगठन है, जिसे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू चलाता है। पन्नू लगातार भारत के खिलाफ जगर उगलता रहा है। खालिस्तान का मुद्दा हालिया महीनों में भारत-कनाडा के संबंधों में तनाव की बड़ी वजह रहा है।

जज गोय रेजिमबाल्ड ने आवेदक कंवलजीत कौर के इस दावे से असहमति जताई कि सिख्स फॉर जस्टिस से जुड़े होने के चलते उनके उत्पीड़न का खतरा है। जज ने कहा, ‘तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए मतदान कार्ड होना यह स्थापित करने के लिए नाकाफी है कि कौर की भारतीय अधिकारियों के बीच कोई उच्च ‘प्रोफाइल’ है।

साल 2018 में गई थीं कनाडा

पंजाब की रहने वाली कौर फरवरी 2018 में कनाडा पहुंची थीं। एक साल से भी अधिक समय बाद सितंबर 2019 में कौर ने शरणार्थी संरक्षण का दावा किया। 32 वर्षीय कंवलदीप कौर ने सुनवाई से अपने मूल आवेदन में संशोधन करते हुए कहा कि वे कनाडा में खालिस्तान समर्थक बन गए हैं। अगर उन्हें भारत वापस भेजा गया तो उनकी नई राजनीतिक गतिविधियों के चलते उन्हें सताया जाएगा

इस पर फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि खालिस्तान आंदोलन में कथित रुचि और भागीदारी का घटनाक्रम वास्तविकता की कमी को दर्शाता है। कोर्ट ने इस दावे को कपटपूर्ण और सद्भावना की कमी वाला बताया। संघीय न्यायालय ने माना कि कौर के दावों में दम नहीं है, उनके बारे में ऐसा नहीं लगता कि वह अपनी गतिविधियों से भारतीय अधिकारियों की नजर में हैं।

कनाडा में खालिस्तान आंदोलन

कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियां बीते कुछ वर्षों में एक बड़ा मुद्दा बनी है। कनाडा में लगातार ऐसी रैलियां और भाषण हुए हैं, जो भारत विरोध और खालिस्तान के पक्ष में रहे हैं। इसने कनाडा और भारत के संबंध खराब किए हैं। खासतौर से जस्टिन ट्रूडो की सरकार में भारत और कनाडा के रिश्ते बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालिया समय में दोनों देशों के संबंधों में सुधार की कोशिश की जा रही है।