भोपाल। राजधानी के सुनियोजित विकास और आम नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराने का जिम्मा संभालने वाला भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) स्वयं बीमार नजर आ रहा है। आंतरिक बदहाली का आलम यह है कि कभी शहर की सूरत बदलने वाला यह संस्थान अब अपने ही अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।इंजीनियर से लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण न केवल निर्माण की गुणवत्ता गिरी है, बल्कि जनता का विश्वास भी डगमगा गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान स्टाफ का 80 प्रतिशत हिस्सा उस आयु वर्ग में है, जो अक्सर स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर रहता है। इसके चलते प्रोजेक्ट के काम और ऑफिस वर्क दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं।
एक अधीक्षण यंत्री और दो कार्यपालन यंत्री के भरोसे प्रोजेक्ट
बीडीए की वर्तमान स्थिति हैरान करने वाली है। वर्तमान में महज एक अधीक्षण यंत्री, दो कार्यपालन यंत्री, दो सहायक यंत्री और सात उपयंत्रियों के कंधों पर शहर के पांच सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स मिसरोद-बैरई रोड, एयरोसिटी, आईएसबीटी, विद्या नगर फेस-3 और मिसरोद चरण एक व दो का भार है। इन इंजीनियरों को न केवल साइट पर रनिंग प्रोजेक्ट्स देखने पड़ते हैं, बल्कि दफ्तर में बैठकर नागरिकों की शिकायतों का निपटारा और लीज रिन्यूअल जैसे तकनीकी काम भी निपटाने पड़ रहे हैं।
अगस्त के बाद और बिगड़ेंगे हालात
आंकड़ों की बाजीगरी देखें तो बीडीए का पतन स्पष्ट नजर आता है। वर्ष 1982 में जहां संस्थान में 700 कर्मचारी और 12 डिवीजन हुआ करते थे, वहीं आज मात्र दो डिवीजन बचे हैं। वर्तमान में कार्यरत 150 कर्मचारियों में से इसी वर्ष 32 लोग सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जिससे यह संख्या घटकर 118 रह जाएगी। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान स्टाफ का 80 प्रतिशत हिस्सा उस आयु वर्ग में है, जो अक्सर स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर रहता है।
बदहाली का सीधा असर
जनता परेशान : स्टाफ की कमी का खामियाजा उन नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई बीडीए के आवासों में लगाई है।
घटती गुणवत्ता : पर्याप्त सुपरविजन न होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पहले जैसी नहीं रही, जिससे आवासों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
चक्कर काटते लोग : छोटे-छोटे कामों के लिए आवंटियों को महीनों दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं, फिर भी काम एक बार में नहीं होता।
रिक्त पद : स्थापना शाखा का काम 9 और राजस्व शाखा भी केवल 10-12 लोगों के भरोसे चल रही है।
160 नए पदों पर भर्ती की जरूरत
बीडीए में प्रथम श्रेणी से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की जरूरत है। जानकार बताते हैं कम से कम 160 लोगों की जरूरत है। यदि इस तरह कर्मचारी कम होते गए तो आने वाले दिनों में बीडीए में सिर्फ खाली कुर्सियां ही नजर आएंगी।
इनका कहना है
बीडीए में स्टाफ की कमी है। शासन को इस बारे में अवगत कराया गया है। जल्द ही आउटसोर्स, प्रतिनियुक्ति, संविदा आदि के जरिए भर्ती की जाएगी। प्रक्रिया चल रही है।



