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बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा में नरैनी रोड स्थित करोड़ों की लागत से निर्मित कांशीराम स्मृति उपवन अब नए स्वरूप में नजर आएगा। करीब डेढ़ दशक से उपेक्षा और बदहाली झेल रहे इस उपवन को अब संवारने की तैयारी शुरू हो गई है। बांदा विकास प्राधिकरण (बीडीए) के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, लखनऊ ने सहमति दे दी है। परिषद की दो सदस्यीय टीम ने सोमवार को उपवन का स्थलीय निरीक्षण कर सात एकड़ भूमि का चयन किया, जहां बुंदेलखंड का पहला साइंस पार्क विकसित किया जाएगा।

वर्ष 2006 में तत्कालीन बसपा सरकार ने करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से 17 एकड़ क्षेत्रफल में कांशीराम स्मृति उपवन का निर्माण कराया था। इसमें 12 फीट ऊंची कांस्य मूर्ति, बच्चों के लिए आधुनिक झूले, पाथ-वे, लाइटें, बेंच, योगा स्थल और रैंप बनाए गए थे। लेकिन यह पार्क जनता के लिए कभी खोला ही नहीं गया। समय के साथ उपवन खंडहर में तब्दील हो गया, झूले और अन्य सामान चोरी हो गए व पूरे परिसर में झाड़ियां फैल गईं।वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी हीरालाल ने इस उपवन को साइंस पार्क के रूप में विकसित करने की पहल की थी। बीडीए ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। इसके बाद वर्ष 2024 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया था। अब परिषद की स्वीकृति मिलने के बाद इस योजना को मूर्त रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

बांदा विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता आर.पी. यादव ने बताया कि कांशीराम स्मृति उपवन के सात एकड़ क्षेत्रफल में साइंस पार्क विकसित किया जाएगा। परिषद की टीम ने स्थल का सर्वे कर लिया है और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू है। इस परियोजना के पूरा होने पर बांदा को न केवल एक नया पर्यटन और शिक्षण केंद्र मिलेगा, बल्कि यह बुंदेलखंड का पहला साइंस पार्क बनकर क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को विज्ञान की दुनिया से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।