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वॉशिंगटन: भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप नई दिल्ली के खिलाफ एक और कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप अब अमेरिकी आईटी कंपनियों को अपना काम भारतीय कंपनियों को आउटसोर्स करने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट और ट्रंप की करीबी समर्थक लॉरा लूमर ने यह दावा किया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में लूमर ने लिखा कि ‘इसका मतलब है कि अब आपको अंग्रेजी के लिए 2 दबाने की जरूरत नहीं है। कॉल सेंटरों को फिर से अमेरिकी बनाएं।’

भारत के आईटी क्षेत्र पर ट्रंप का हमला

ट्रंप अपने अमेरिका फर्स्ट एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर भारत का आईटी क्षेत्र है। लॉरा लूमर का दावा बताया है कि ट्रंप और उनके सलाहकार अमेरिकी कंपनियों के भारत को आईटी सेवाएं आउटसोर्स करने पर प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रंप का यह कदम वैश्विक तकनीकी बाजारों को हिला सकता है। यह भारत के 250 अरब डॉलर से ज्यादा के तकनीकी सेवा उद्योग की रीढ़ पर सीधा हमला होगा।

ट्रंप का आउटसोर्सिंग पर प्रतिबंध भारत के तकनीकी उद्योग को लंगड़ा बना सकता है, जो 250 अरब डॉलर से ज्यादा का क्षेत्र है और लाखों पेशेवरों को रोजगार देता है। अमेरिका का इस पर लगाम लगाना बड़े पैमाने पर छंटनी को बढ़ावा दे सकता है। भारत में इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियां अपना बड़ा हिस्सा अमेरिकी ग्राहकों से कमाती हैं। प्रतिबंध लगाने से रातोंरात अनुबंध खत्म हो सकते हैं।