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हरियाणा के ओलिंपियन रेसलर व अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। बजरंग के बड़े भाई हरेंद्र पूनिया ने पिता को मुखाग्नि दी।

उनकी पार्थिव देह शुक्रवार सुबह सोनीपत से झज्जर स्थित पैतृक गांव खुड्‌डन में लाई गई थी। यहां पर शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, इस दौरान परिजन रोते-बिलखते दिखे। इस दौरान रेसलर साक्षी मलिक के पति सत्यव्रत कादियान और बबीता फोगाट के पति विवेक सुहाग भी पूनिया के पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। हालांकि, अंतिम संस्कार में कांग्रेस के बड़े नेता नजर नहीं आए।

बता दें कि बलवान पूनिया ने गुरुवार शाम 6 बजे 71 साल की की उम्र में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। 18 दिन से वह अस्पताल में भर्ती थे। उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए थे।

बजरंग के पिता बलवान पूनिया का जन्म 22 जुलाई 1954 को हुआ था। वह 4 भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके बाद जगबीर, रणबीर और सबसे छोटे दलबीर हैं। रणबीर पूनिया का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि दलबीर इस समय रेलवे पुलिस में कार्यरत हैं।

खुद पहलवानी नहीं कर पाए तो बेटे बजरंग को ओलिंपियन बनाया बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया भी पहलवानी करते थे। मगर, आर्थिक हालात खराब होने के कारण वे अपना सपना पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने बजरंग को पहलवान बनाने की ठानी। 7 साल की उम्र से ही बजरंग को पहलवानी की प्रैक्टिस करानी शुरू कर दी। उन्होंने खुद भी बचपन से ही बजरंग को अखाड़े के गुर सिखाने शुरू कर दिए। उनकी इच्छा थी कि बेटा देश का नामी पहलवान बने, जो बजरंग ने ओलिंपिक तक पहुंचकर सच कर दिखाया।