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बेंगलुरु: आप अक्सर हवाई यात्रा (Air Travel) करते रहते हैं तो इस तरह की घटना से आप भी परिचित होंगे। किसी का कीमती सूटकेस एयरलाइन की स्टाफ की गलती से टूट जाता है। एविएशन कंपनी उसका उचित मुआवजा देने से इंकार कर देती है। तब पीड़ित यात्री कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है। वहां उसे मिलता है न्याय। बेंगलुरु के सौरभ रापेरिया (Saurabh Raperia) के साथ ऐसा ही हुआ।

क्या है वाकया

यह वाकया करीब डेढ़ साल पहले का है। बेंगलुरु में रहने वाले 28 वर्षीय सौरभ रापेरिया 8 सितंबर 2024 को एयर इंडिया (Air India) की एक फ्लाइट से दिल्ली से बेंगलुरु की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने एक ट्रॉली बैग चेक-इन बैगेज के रूप में डाला। एयरलाइन स्टाफ को बोल कर उस पर फ्रेजाइल (Fragile) का भी टैग लगवा दिया गया। जब वह बेंगलुरु के कैम्पगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Kempegowda International Airport) पर उतरा और अपना ट्रॉली बैग कलेक्ट किया तो वह टूटा था।

स्टाफ ने नहीं किया सपोर्ट

इसके बाद सौरभ ने एयर इंडिया के बैगेज सर्विस काउंटर पर पहुंच कर कंप्लेन लिखवाना चाहा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सौरभ के मुताबिक कर्मचारी ने शिकायत लेने से मना कर दिया और प्रॉपर्टी इरेगुलेरिटी रिपोर्ट (PIR) इश्यू करने से मना कर दिया। उन्हें सुझाव मिला कि ईमेल से कंप्लेन कर दो। इसके बाद उनहोंने उसी दिन बाद में इस घटना को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। तब कंपनी ने इस पर संज्ञान लिया।

₹500 के मुआवजे का ऑफर

दो दिन बाद कंपनी ने ₹500 का मुआवजा देने का ऑफर दिया। लेकिन सौरभ ने इसे अपर्याप्त बता कर लेने से मना कर दिया। तब इसे बढ़ा कर 1,000 रुपये किया गया। जबकि वह लगातार टूटे बैग की क्वालिटी का बैग देने या फिर उसका दाम 13,425 रुपये चुकाने को कहा। लेकिन एयरलाइन ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद 23 सितंबर 2024 को उसने कंपनी को लीगल नोटिस भेजा जो कि अनुत्तरित रहा।

कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

सौरभ ने 10 दिसंबर 2024 को कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां एयर इंडिया ने कहा कि उनके ऊपर आरोप निराधार है। इसमें सेवा में कमी या अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का कोई मामला नहीं है, इसलिए मुकदमा खारिज किया जाए। दोनों पक्षों की बात सुनते हुए कंज्यूमर कमीशन ने 17 फरवरी 2026 को आदेश पारित किया। कोर्ट ने एयर इंडिया को क्षति के लिए 7,000 रुपये देने का निर्देश दिया। साथ ही मुकदमे के खर्च के लिए भी 10,000 रुपये देने का निर्देश दिया।