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भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत देते हुए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब परिजनों को आवेदन, सत्यापन या काउंटर के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। एम्स प्रबंधन ने आईआईटी इंदौर के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह सुनियोजित ऑनलाइन सिस्टम विकसित किया है, जिससे अब प्रमाण पत्र एम्स की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के जरिए सीधे डाउनलोड किए जा सकेंगे।

वार्ड स्तर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया: रिकॉर्ड होगा सुरक्षित

इस नई व्यवस्था के तहत संबंधित वार्ड की नर्सिंग टीम और ड्यूटी डॉक्टर ऑनलाइन मॉड्यूल में माता-पिता की पहचान, आधार, मोबाइल नंबर और जन्म या मृत्यु का समय तत्काल दर्ज करेंगे। मेडिकल रिकॉर्ड विभाग में इस डेटा के सत्यापन के बाद डिजिटल कॉपी पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी। पहले जहां इस प्रक्रिया में कई दिन का समय लगता था और परिजनों को दो-तीन बार अस्पताल आना पड़ता था, वहीं अब मात्र 24 से 48 घंटे में दस्तावेज उपलब्ध हो जाएगा।

पारदर्शिता और रिकॉर्ड सुरक्षा पर फोकस: घर बैठे डाउनलोड की सुविधा

एम्स में हर महीने औसतन 300 से अधिक जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होते हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इस डिजिटल एकीकरण से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि रिकॉर्ड की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। परिजन अपने रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए घर बैठे इसे डाउनलोड कर सकेंगे।