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मऊ: उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ में शाहगंज रेलखंड पर प्रस्तावित अंडरपास को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। घोसी सांसद राजीव राय और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एके शर्मा के समर्थकों के बीच विकास कार्यों को लेकर वर्चस्व की जंग खुलकर सामने आ गई है। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह राजनीतिक खींचतान अब बयानबाजी तक पहुंच चुकी है, जिससे जिले की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, मऊ-शाहगंज रेलखंड पर तालीमुद्दीन इंटर कॉलेज के पास हैदरनगर और अलीनगर को जोड़ने वाली सड़क पर रेलवे अंडरपास निर्माण को लेकर दोनों नेताओं ने अलग-अलग दावे किए।

घोसी सांसद राजीव राय ने 9 मार्च को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर मऊ-शाहगंज रेलखंड पर तालीमुद्दीन इंटर कॉलेज के पास अंडरपास निर्माण के लिए दिए गए अपने आवेदन के बारे में फिर से अवगत कराया है।

मंत्री ने भी साझा की अंडरपास की योजना

सांसद के पोस्ट के करीब 53 मिनट बाद कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि मऊ जिले में जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए कई स्थानों पर रेलवे लाइन पर समपार या अंडरपास निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने 14C, 25C और 27C जैसे प्रमुख स्थानों का जिक्र करते हुए कहा कि मऊ नगर के हैदरनगर-अलीनगर-रहजनीया क्षेत्र और ठकुरमनपुर (5C) पर भी अंडरपास की आवश्यकता है। मंत्री ने बताया कि इन कार्यों के लिए रेल मंत्री से पुनः आग्रह किया गया है।

समर्थकों में भी बढ़ी सियासी तनातनी

दोनों नेताओं के पोस्ट सामने आने के बाद जिले में उनके समर्थकों के बीच बहस तेज हो गई। सोशल मीडिया पर समर्थक अपने-अपने नेताओं के दावों को सही बताते हुए एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

मऊ जिले की राजनीति में विकास कार्यों को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी कई परियोजनाओं को लेकर कैबिनेट मंत्री और घोसी के पूर्व व वर्तमान सांसदों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल चुके हैं।

विकास कार्यों पर जनता में भी भ्रम

विकास कार्यों के दावों और सियासी बयानबाजी के बीच आम जनता में भी भ्रम की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर जिले में हो रहे विकास कार्यों का श्रेय किसे दिया जाए।

कसारा-कोपागंज सड़क के निवासी दीपक मिश्रा का कहना है कि नेताओं ने कई बार पत्र और घोषणाएं तो दिखाईं, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कब होगा यह स्पष्ट नहीं है। वहीं सरवा-हथिनी मार्ग को लेकर स्थानीय निवासी अभिषेक राय का कहना है कि अब लोगों ने सड़क बनने की उम्मीद ही छोड़ दी है।

विकास की राजनीति पर उठ रहे सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विकास कार्यों को लेकर श्रेय की राजनीति भले ही नेताओं को फायदा पहुंचाए, लेकिन इससे जनता के असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। फिलहाल मऊ में अंडरपास को लेकर शुरू हुआ यह सियासी विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।