सुकमा। जिले के इतिहास में पहली बार वन विभाग ने वनकर्मियों, संयुक्त वन प्रबंधन समिति एवं जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्यों के लिए वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह पहल न केवल वन विभाग की क्षमता वृद्धि बल्कि स्थानीय समुदाय को संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुई है।
सुकमा एवं दोरनापाल उपमंडल के कर्मचारियों का प्रशिक्षण 23 और 24 अगस्त को जिला मुख्यालय सुकमा में आयोजित हुआ। इसमें राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य एवं ख्यातिप्राप्त वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र मिश्रा ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया। वहीं 20 और 21 अगस्त को कोन्टा में आयोजित प्रशिक्षण में नोवा नेचर फाउंडेशन के सुराज ने वन्यजीव प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पहली बार जेएफएमसी और बीएमसी के सदस्य भी इसमें शामिल हुए। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम केवल वन विभाग तक सीमित न रहकर स्थानीय समुदाय तक पहुंचा, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति साझा जिम्मेदारी और जागरूकता का नया अध्याय शुरू हुआ।
वनमंडलाधिकारी सुकमा श्री अक्षय भोसलें ने कहा कि सुकमा जैसे घने वनों वाले जिले में वन्यजीव संरक्षण हमेशा से चुनौती रहा है। यह प्रशिक्षण केवल विभागीय कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे जिले में सामान्य स्थिति लौट रही है, वन क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ रही है। ऐसे में विभाग और समुदाय का संयुक्त प्रयास भविष्य में दूरगामी परिणाम देगा।
सुकमा का विशाल वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है, जहाँ कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण वन्यजीव पाए जाते हैं। विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान वनकर्मियों और समितियों को वैज्ञानिक तरीकों, कानूनी प्रावधानों और संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक उपायों से अवगत कराया। साथ ही यह भी बताया गया कि वन्यजीव संरक्षण कैसे पर्यावरणीय संतुलन, जल स्रोतों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को प्रोत्साहित करता है।