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इस्लामाबाद: पहलगाम में आतंकी हमला करवाने के पीछे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर की मंशा ही घरेलू राजनीति में सेना विरोधी लहर को शांत करना था। असीम मुनीर भारत के साथ संघर्ष कर इसमें कामयाब भी रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान में एक बार फिर से आर्मी के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं। पाकिस्तान के सबसे बड़े राजनीतिक धार्मिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की सेना पर सीधा हमला बोला है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने नाकामियों को लेकर पाकिस्तान की सेना को बेइज्जत कर दिया है।

मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि ‘इतिहास सबको पता है कि कैसे एक हिन्दू के सामने 90 हजार से ज्यादा फौजियों ने सरेंडर कर दिया था।’ उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान की सेना का योगदान, पाकिस्तान को तोड़ने में ना, ना कि बनाने में।" उन्होंने कहा कि "सन 1971 में 90 हजार से ज्यादा फौजी एक हिन्दू के सामने सरेंडर हुए और हमारी नाक काट दी।" मौलाना फजलुर रहमान जब मंच से सेना की इज्जत उतार रहे थे, उस वक्त वहां मौजूद लोग सेना के लिए ‘शर्म करो, शर्म करो’ के नारे लगा रही थी।

मौलाना रहमान ने पाक फौज की इज्जत उतारी
मौलाना फजलुर रहमान ने इस दौरान कहा कि देश की फौजी लीडरशिप अब भी जनता के सामने झूठी तस्वीर पेश करने की कोशिश करती है, लेकिन हकीकत यह है कि जनता सब कुछ जानती और समझती है। मौलाना रहमान ने 1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि, पाकिस्तानी सेना उस समय भारतीय सेना के सामने इस कदर हार गई थी कि आज भी देशवासियों के लिए वह एक गहरे घाव की तरह है। उन्होंने कहा, "90,000 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक एक हिंदू कमांडर के सामने हथियार डाल चुके थे, इससे बड़ी बेइज्जती और क्या हो सकती है?"
मौलाना फजलुर रहमान ने आगे कहा कि देश की मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक गिरावट के लिए भी सेना का दखल जिम्मेदार है। उनके मुताबिक, सेना ने जिस तरह सत्ता और नीतियों में दखल देकर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर किया है, उसका खामियाजा आज पूरा देश भुगत रहा है। आपको बता दें कि 1971 की लड़ाई में भारत के सामने पाकिस्तान की बेशर्म हार हुई थी। भारतीय सेना के आगे पाकिस्तान सेना के 93 हजार सैनिकों ने सरेंडर कर दिया था। इस युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।