‘द बंगाल फाइल्स’ रिलीज से पहले विवादों में हैं। फिल्म पर पश्चिम बंगाल की छवि खराब करने के आरोप लग रहे हैं। बीते दिनों कोलकाता में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में खूब बवाल हुआ। होटल में तार काटे गए। मेकर्स के खिलाफ एक FIR भी दर्ज हुई। फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने ‘नवभारत टाइम्स’ से बातचीत में खुलकर कहा कि वो ‘एजेंडा’ वाली फिल्में ही बनाते हैं। अब एक्टर मिथुन चक्रवर्ती ने भी इस पूरे विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। ‘दादा साहब फाल्के अवॉर्ड’ से सम्मानित 75 साल के मिथुन दा ने कहा कि उनकी यह फिल्म सच्चाई दिखाती है और यही कारण है कि यह अपने-आप राजनीति प्रेरित हो गई है।
न्यूज एजेंसी ‘IANS’ से बातचीत के दौरान जब मिथुन चक्रवर्ती से फिल्म को लेकर हो रहे विरोध और विवाद के बार में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘जैसे ही आप हकीकत दिखाते हैं, वह अपने आप राजनीति से प्रेरित हो जाती है। यह आश्चर्यजनक है कि कोई भी सच्चाई का सामना नहीं करना चाहता।’
मिथुन चक्रवर्ती ने कहा- क्यों हुआ, कैसे हुआ, कोई नहीं जानना चाहता
यह फिल्म साल 1946 में हुए दंगों पर आधारित है, जिसे इतिहास में काले पन्नों में ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ और ‘1946 ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ भी कहा जाता है। कोलकाता में पैदा हुए मिथुन चक्रवर्ती ने आगे कहा, ‘क्या आप जानते हैं कि नोआखली में क्या हुआ था? यह मेरे जन्म से पहले हुआ था। बस इतना ही पता है कि ‘बहुत सारे लोग मारे गए’, बस। ग्रेट कलकत्ता हत्याकांड के बारे में भी यही कहा गया था। कोई नहीं जानना चाहता कि यह कैसे और क्यों हुआ, लेकिन विवेक अग्निहोत्री कह रहे हैं, कृपया सच को जानें।’
मिथुन दा बोले- नोआखली में 40 हजार हिंदू मारे गए
विवेक अग्निहोत्री के साथ ‘द कश्मीर फाइल्स’ में काम कर चुके मिथुन दा ने आगे कहा, ‘नोआखली में नरसंहार हुआ था, जिसमें लगभग 40,000 हिंदू मारे गए थे। कलकत्ता नरसंहार में भी यही हुआ था और लोग इसका विरोध करेंगे। यही सच्चाई है और जैसे ही कोई सच्चाई की बात करता है, वह राजनीति से प्रेरित हो जाती है। हम इसमें क्या कर सकते हैं?’
गोपाल मुखर्जी के पोते ने दर्ज करवाई FIR
इस बीच, बीते सोमवार को डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। आरोप है कि फिल्म में स्वतंत्रता सेनानी गोपाल मुखर्जी को गलत तरीके से दिखाया गया है। यह केस गोपाल मुखर्जी के पोते ने दर्ज किया है। संताना मुखर्जी ने एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि निर्माताओं ने परिवार की पूर्व अनुमति के बिना फिल्म में उनके दादा को चित्रित किया है।
संताना मखुजी बोले- फिल्म में दादा को ‘कसाई’ बताया गया
संताना मुखर्जी ने कहा है, ‘हमें फिल्म में अपने दादा जी को ‘कसाई’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति है। स्वतंत्रता सेनानियों के समूह ‘अनुशीलन समिति’ का हिस्सा होने के अलावा, मेरे दादा की बकरे के मांस की दो दुकानें भी थीं। वह एक पहलवान थे। उन्होंने 1946 में कोलकाता में मुस्लिम लीग द्वारा फैलाई गई सांप्रदायिक हिंसा से लोगों की रक्षा के लिए हथियार उठाए थे।’